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केशव का शिक्षाकाल

केशव का शिक्षाकाल जैसे जैसे केशव (बाबोजी) बड़ा हो रहा था वैसे वैसे उसकी प्रतिभा बाहर नजर आने लगी । गुरुकुल में सभी बच्चे पढ़ रहे थे तभी वहां लुटेरों ने आक्रमण कर दिया जिससे सभी बच्चे और गुरुजी डर गए । उन लूटेरो ने बच्चो और गुरुजी को मारना शुरू किया यह देखकर केशव को लगा कि अगर में अपने गुरु और मित्रो की भी रक्षा नही कर सकता तो ऐसे जीवन का क्या मतलब? तभी उनकी नज़र पास ही बने मधुमखी के छत्ते पर पडी पहले तो उन्होंने गुरुजी और मित्रो को चटाई के नीचे छुपने का इशारा किया फिर उन्होंने एक पत्थर उठाकर मधुमक्खी के छत्ते पर दे मारा । मधुमक्खी के डंक खाकर लुटेरे वहाँ से भाग निकले। इस तरह केशव ने अपने शिक्षा काल मे गुरुजी और मित्रो की रक्षा की।

केशव/बाबोजी का शिक्षाकाल| Keshav/Baboji ka shikshakal

केशव का शिक्षाकाल जैसे जैसे केशव (बाबोजी) बड़ा हो रहा था वैसे वैसे उसकी प्रतिभा बाहर नजर आने लगी । गुरुकुल में सभी बच्चे पढ़ रहे थे तभी वहां लुटेरों ने आक्रमण कर दिया जिससे सभी बच्चे और गुरुजी डर गए ।  उन लूटेरो ने बच्चो और गुरुजी को मारना शुरू किया                               यह देखकर केशव को लगा कि अगर में अपने गुरु और मित्रो की भी रक्षा नही कर सकता तो ऐसे जीवन का क्या मतलब?                  तभी उनकी नज़र पास ही बने मधुमखी के छत्ते पर पडी पहले तो उन्होंने गुरुजी और मित्रो को  चटाई के नीचे छुपने का इशारा किया फिर उन्होंने एक पत्थर उठाकर मधुमक्खी के छत्ते पर दे मारा ।                मधुमक्खी के डंक खाकर लुटेरे वहाँ से भाग निकले।  इस तरह केशव ने अपने शिक्षा काल मे गुरुजी और मित्रो की रक्षा की।

बाबोजी की अनन्य भक्त रामी देवी की बच्ची हुई कैंसर से मुक्त || Jai Baboji

🙏जय बाबोजी🙏 बाबोजी की लीला अपरम्पार है।। बाबोजी की अनन्य भक्त रामी देवी की बच्ची हुई कैंसर से मुक्त ।। बाबोजी के चमत्कारों के बीच एक ओर चमत्कार सामने आया है जिसमे बाबोजी की भक्त रामी देवी जिसकी 16 साल की बच्ची को चौथे स्टेज का कैंसर था और डॉक्टर ने भी मना कर दिया । लेकिन रामी देवी को बाबोजी पर अटूट श्रद्धा थी। वो दिन रात अपने बेटी के बारे में सोच सोच कर परेशान रहती थी लेकिन बाबोजी पर इतनी श्रद्धा थी कि उसने सब कुछ बाबोजी पर छोड़ दिया था। डॉक्टर के अनुसार उसकी बेटी ज्यादा से ज्यादा 4 महीने ओर बचेगी। इससे वो ओर उसका परिवार हताश हो गया लेकिन रामी देवी ने अपनी श्रद्धा नही छोड़ी। वो दिन रात बाबोजी को याद करती और किसी तरह अपनी बच्ची को बचाने की गुहार बाबोजी से करती। जैसे जैसे दिन नजदीक आ रहे थे रामी देवी की बेटी की तबियत खराब रहने लगी।। लेकिन रामी देवी ने अपनी  भक्ति नही छोड़ी । एक दिन रामी देवी को बाबोजी की अनुभूति हुई कि पास ही के एक बरगद के पेड़ के पास बाबोजी बिराजमान है और वहां उसकी बेटी खेल कूद रही है ।। रामी देवी तुरंत बाबोजी का इशारा समझ अपनी बेटी को वहां ले गयी । लेकि...