केशव का शिक्षाकाल
केशव का शिक्षाकाल जैसे जैसे केशव (बाबोजी) बड़ा हो रहा था वैसे वैसे उसकी प्रतिभा बाहर नजर आने लगी । गुरुकुल में सभी बच्चे पढ़ रहे थे तभी वहां लुटेरों ने आक्रमण कर दिया जिससे सभी बच्चे और गुरुजी डर गए । उन लूटेरो ने बच्चो और गुरुजी को मारना शुरू किया यह देखकर केशव को लगा कि अगर में अपने गुरु और मित्रो की भी रक्षा नही कर सकता तो ऐसे जीवन का क्या मतलब? तभी उनकी नज़र पास ही बने मधुमखी के छत्ते पर पडी पहले तो उन्होंने गुरुजी और मित्रो को चटाई के नीचे छुपने का इशारा किया फिर उन्होंने एक पत्थर उठाकर मधुमक्खी के छत्ते पर दे मारा । मधुमक्खी के डंक खाकर लुटेरे वहाँ से भाग निकले। इस तरह केशव ने अपने शिक्षा काल मे गुरुजी और मित्रो की रक्षा की।